स्टोरी@रक्सौल

 स्टोरी@रक्सौल

[प्रथम एपिसोड]
रक्सौल अनुमंडल में चार प्रखंड है। रक्सौल नगर परिषद में पच्चीस वार्ड है। इसका जिला मोतिहारी है। मोतिहारी के सांसद राधा मोहन सिंह है। संसदीय क्षेत्र बेतिया है। इसके सांसद संजय जयसवाल हैं। रक्सौल विधानसभा के विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा हैं। यह नेपाल के औद्योगिक क्षेत्र वीरगंज से सटा हुआ है। इसका कमिश्नरी मुजफ्फरपुर[तिरहुत] है। मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद हैं।
मेरा बचपन महदेवा गांव में बीता हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के दौरान मुजफ्फरपुर व पटना में कई वर्षों तक रहा। मैंने वर्षों से बात-चीत के क्रम में म्रेरे गुरु रहे डॉ. हरीन्द्र हिमकर, प्रोफेसर विजय पाण्डेय, प्रोफेसर महेश्वर झा, प्रोफेसर डॉ. अनिल सिन्हा, प्रोफेसर प्रमोद सिन्हा, प्रोफेसर अजीत सिंह, पूर्व प्राचार्य स्व. प्रो. पृथ्वी चन्द प्रसाद, शिक्षक स्व. कन्हैया प्रसाद सहित आदि शिक्षाविद्दो से जानने का प्रयास किया था कि आखिर रक्सौल का नाम रक्सौल कैसे पड़ा।
जानें -
किसी भी स्थान के नामकरण के पीछे कोई न कोई इतिहास होता है जिसके आधार पर मनुष्य किसी भी स्थान, गांव, शहर. प्रदेश व देश का नामकरण करता आया है। धीरे धीरे नियत नाम जन मानस में व्यापक रूप से प्रचारित प्रसारित हो जाता है। कालान्तर में उन नामों में बोलचाल की भाषा या भाषा अशुद्धि के कारण धार्मिक सोच के अनुरूप सुधार भी होता रहा है।
रक्सौल नाम की खोज करने पर इसी तरह की एक दो बातें सामने आयी है। कुछ लोगों का यह कहना है कि कभी यह क्षेत्र घनघोर जंगल था और यहां राक्षस रहा करते थे। इसलिए इसका नाम रक्सौल पड़ा। कुछ लोगों का सीमा भूमि पर बनने-बिकने वाली रक्सी [शराब ] से रक्सौल नाम जोड़ना, फिर कुछ लोगों द्वारा अंग्रेजी के रैस्कल से बिगड़ते-बिगड़ते रक्सौल हो जाना, कहना न केवल कल्पना की उड़ान है बल्कि कुछ-कुछ हास्यास्पद भी है...........।
शेष दुसरे दिन के पोस्ट में पढ़े।







नवीन कुमार सिंह, पत्रकार, रक्सौल

Master of journalism & Mass communication, Patna

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