चम्पारण के स्कूल टीचर, ड्राइवर, चपरासी और गार्ड का दर्द, पढ़े पुरी खबर

रामगढ़वा पूर्वी चंपारण(बिहार)

डी.एन.कुशवाहा

=सिर्फ शिक्षण संस्थान व सिनेमा घर को छोड़ कर सरकार ने सबकुछ खोल दिया, तो स्कूल कोचिंग क्यों नहीं ? : प्रमोद कुमार मिश्रा

=एक छोटा सा स्कूल टीचर, ड्राइवर, चपरासी और गार्ड मिला कर कम से कम 50 लोगों को देता है रोजगार

सरकार ने देश की लगभग सारी चीजें खोल दी है जहां जाम और अपार भीड़ का नजारा रोज दिख रहा है। सिर्फ शिक्षण संस्थान और सनेमा घर को छोड़ कर।

   सरकार में जिम्मेवारी के पद पर आसीन महानुभाव ने कभी यह सोंचा है कि एक प्राईवेट स्कूल से कितनों को रोजगार मिलता है। उक्त बातें प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ऑफ टीचर्स वेलफेयर पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल अध्यक्ष प्रमोद कुमार मिश्र ने अरेराज अनुमंडल के निजी स्कूल संचालकों की सांकेतिक धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए रविवार को कही। साथ ही उन्होंने कहा कि एक छोटे से स्कूल में शिक्षक, ड्राइवर, चपरासी और गार्ड आदि को मिलाकर कम से कम 50 लोगों को रोजगार मिलता है। वहीं

बड़े विद्यालयों में शिक्षक, स्टाफ, ड्राइवर, चपरासी तथा गार्ड आदि को मिलाकर 120 से 180 या 200 बेरोजगारों को रोजगार मिलता है। मतलब एक संस्था से 50 परिवार से 200 परिवार का जीवन चलता है।

     सिनेमा घर मे भी मालिक से स्टाफ और कैंटीन, पार्किंग, ऑपरेटर तथा गार्ड आदि को मिलाकर  कम से कम 50 लोगों को रोजगार मिलता है। अभी लगभग डेढ़ साल से सभी विद्यालय, कोचिंग व सिनेमाघर आदि बंद पड़े हैं! ऐसी विकट परिस्थिति में भली-भांति सोचा जा सकता है कि स्कूल ,कोचिंग व सिनेमा घर पर आश्रित करोड़ों परिवार का गुजारा कैसे चल रहा होगा ? 

    सरकार को अब इन संस्थओं यथाशीघ्र खोलने के बारे में विचार करना चाहिए। इनको कुछ  नियमों के साथ खोला जाना चाहिए।

    जब सब कुछ ऑन हो गया तो शिक्षा को चौपट करने पर क्यों तुली है सरकार-- ?

उन्होंने कहा कि स्कूल कोचिंग आदि में तो मास्क, सैनिटाइजर ,सोशल डिस्टेंसिंग आदि का शत प्रतिशत पालन स्कूल व कोचिंग संचालक करते हैं। लेकिन बाजार की भीड़ ,बस जीप आदि अन्य सवारियों में इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है फिर भी खोल दिया गया। तो कहां कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है ? स्कूल कोचिंग खोल देने से क्या  कोरोना का संक्रमण बढ़ जाएगा ?

   कोरोना के लॉकडाउन में लगभग डेढ़ साल से स्कूल कोचिंग आदि बंद हैं। जिस पर आश्रित लोगों को एक पैसे का आमदनी नहीं हो रहा है। सभी भूखे मर रहे हैं। या तो सरकार स्कूल कोचिंग पर आश्रित लोगों को कुछ आर्थिक सहायता राशि दे, जिससे उनका भरण पोषण हो सके । नहीं तो मानवता के नाते सरकार के मंत्री, विधायक तथा सांसद आदि को भी अपना वेतन व पेंशन छोड़ देना चाहिए।

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