बिहार की सियासत में माने जाते हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दाहिने हाथ

 बिहार-


जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने बीते बुधवार को बतौर केंद्रीय मंत्री का शपथ ग्रहण ली। लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल जगह बनाने को लेकर चल रही जद्दोजहद के बाद आखिरकार जेडीयू ने मंत्रिमंडल में जगह बनाई है साल 2004 के बाद जेडीयू के किसी भी नेता को केंद्रीय कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी आखिरी बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही केंद्रीय मंत्री बने थे उनके बाद अब आरसीपी सिंह को मंत्री बनाया गया है। 

आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्री बनने पर  मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय के पूर्व सीनेटर सह प्रोफेसर शब्बीर अहमद, एमएफबीएच के संस्थापक अध्यक्ष सह वरीय पत्रकार अमरेन्द्र तिवारी ने बधाई दी है। साथ ही रक्सौल से बधाई देने वालों में जदयू के प्रदेश सचिव भुवन पटेल, नगर अध्यक्ष सह पूर्व वार्ड पार्षद सुरेश कुमार, प्रखंड अध्यक्ष डॉ सौरव राव, युवा विधानसभा प्रभारी मुकेश कुमार, अतिपिछड़ा प्रकोष्ट जिलाउपाध्यक्ष दुर्गेश कुमार, अतिपिछड़ा के रविशंकर प्रसाद, अतिपिछड़ा के प्रखंड अध्यक्ष अजय कुमार, नगर अध्यक्ष विनोद कुमार , व्यवसायिक प्रकोष्ट के अशोक कुमार साह, सूरज गुप्ता, इंद्रजीत पटेल शामिल है 

मालूम हो कि आरसीपी सिंह का पूरा नाम रामचंद्र प्रसाद सिंह है उनका जन्म 6 जुलाई 1958 को हुआ था आरसीपी सिंह के पिता का नाम स्वर्गीय श्री सुखदेव नारायण सिंह है माता का नाम स्वर्गीय श्रीमती दुख लालो देवी है। उनका स्थायी पता, मुस्तफापुर टोला, माल्टी, पोस्ट ऑफिस और पुलिस स्टेशन-अस्थावां, जिला नालंदा है। आरसीपी सिंह दिल्ली में 402, स्वर्ण जयंती सदन, डॉ. बीडी मार्ग दिल्ली में रहते हैं। आरसीपी सिंह ने 21 मई 1982 को श्रीमती गिरिजा सिंह से शादी की। आरसीपी सिंह की दो बेटियां हैं उनकी एक बेटी लिपी सिंह 2016 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। दूसरी बेटी लता सिंह ने क़ानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत को अपना पेशा बनाया है 

आरसीपी सिंह की शुरुआती शिक्षा हाइस्कूल, हुसैनपुर, नालंदा और पटना साइंस कॉलेज से हुई है बाद में जेएनयू में पढ़ने के लिए गये राजनीति में शामिल होने से पहले आरसीपी सिंह कृषक थे सिविल सेवा में आने के बाद वे 1986-88 उप-विभागीय अधिकारी / मजिस्ट्रेट, खलीलाबाद, उत्तर प्रदेश रहे 1988-90 मुख्य विकास अधिकारी, कानपुर, उत्तर प्रदेश रहे 1990-92 तक संयुक्त सचिव, नियुक्ति विभाग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार में रहे उसके बाद 1993- 97 तक कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट रामपुर, बाराबंकी, हमीरपुर और फतेहपुर रहे इस दौरान उनकी नज़दीकी समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रहे बेनी प्रसाद वर्मा से बढ़ी साल 1996 में बेनी प्रसाद वर्मा केंद्रीय दूर संचार मंत्री थे तब आरसीपी सिंह उनके निजी सचिव थे। आरसीपी सिंह जुलाई 1997-मार्च 1998 संचार मंत्री के निजी सचिव रहे मार्च 1998-मई 2004 भूतल परिवहन मंत्री के निजी सचिव रहे बेनी प्रसाद वर्मा ने ही आरसीपी सिंह की मुलाक़ात नीतीश कुमार से कराई थी आरसीपी सिंह एक तो नीतीश कुमार के ही गृह ज़िले नालंदा के थे और स्वजातीय भी थे। नीतीश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री बने। वर्ष 1998 में जब नीतीश कुमार केंद्र में रेल मंत्री बने तब उन्होंने आरसीपी सिंह को अपना विशेष सचिव बनाया। उसके बाद लगातार वह नीतीश कुमार के साथ रहे।

उसके बाद आरसीपी सिंह रेलवे मंत्री के जुलाई 2004-दिसंबर 2005 अतिरिक्त सचिव रहे बाद में सीईओ, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश रहे दिसंबर, 2005 से मई 2010 बिहार के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे जुलाई 2010 को उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया 2010 में उन्होंने आईएएस से इस्तीफ़ा दिया और नीतीश कुमार ने उन्हें राज्य सभा भेजा 2016 में वे पार्टी की ओर से दोबारा राज्यसभा पहुंचे और शरद यादव की जगह राज्यसभा में पार्टी के नेता भी मनोनीत किए गए। वर्तमान सरकार में  [2021] में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल जगह मिली है  

पटना के पत्रकार विवेक चन्द्रा का कहना है कि आरसीपी की कुशलता ने भी नीतीश कुमार को अपना मुरीद बनाया होगा तभी उन्होंने रेल मंत्री के तौर पर आरसीपी सिंह को अपना निजी सचिव बनाया और जब 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने तो यूपी कैडर के अधिकारी को अपने राज्य में पदस्थापित कराने के लिए उन्होंने पूरा जोर लगायाआरसीपी सिंह प्रधान सचिव के तौर पर पटना चले आए और देखते देखते वे नीतीश कुमार के आंख और कान बन गए। उसके बाद आरसीपी सिंह ने 2010 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से वीआरएस के तहत स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया था। इसके बाद नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को राज्यसभा भेज दिया। आरसीपी सिंह, नीतीश कुमार के अच्छे दोस्त ही नहीं हैं बल्कि, उनके बड़े सियासी सलाहकार भी हैं। यही वजह है कि पार्टी ने उन्हें जेडीयू अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी में नीतीश कुमार के बाद नंबर दो के नेता माने जाते हैं। आरसीपी की जदयू संगठन पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। चुनाव में सीटों का बंटवारा हो या पार्टी प्रत्याशी चुनने की जिम्मेदारी, मुख्यमंत्री  नीतीश उनपर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। आरसीपी सिंह बिहार की सियासत में नीतीश कुमार के दाहिने हाथ मानें जाते हैं 

वरीय पत्रकार अमरेन्द्र तिवारी का कहना है कि आरसीपी सिंह को 'जेडीयू का चाणक्य' भी कहा जाता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खासमखास माने जाते हैं आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के मित्र, राजनीतिक रणनीतिकार और सियासी सलाहकार हैं। यही वजह है कि आरसीपी सिंह को केंद्र की ताजपोशी मिली हैं

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