जॉर्ज फर्नांडिस: किंग जॉर्ज-V पर पड़ा था नाम

मुजफ्फरपुर,-
देश के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल की उम्र में निधन हो गया है. जॉज फर्नांडिस ने साल 1967 से 2004 तक 9 लोकसभा चुनाव जीते और इस दौरान उन्होंने कई बड़े मंत्रालय भी संभाले, जिसमें रक्षामंत्री, कम्यूनिकेशन, इंडस्ट्री और रेलवे मंत्रालय का नाम शामिल है. 'अनथक विद्रोही' के नाम से मशहूर जॉर्ज फर्नांडिस ने देश में कई बड़ी हड़ताल और विरोध का नेतृत्व किया था, जिसमें 1974 में की गई देशव्यापी रेल हड़ताल अहम है. जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म 3 जून 1930 को जॉन जोसफ फर्नांडिस के यहां मेंगलुरू में हुआ था. वे अपने 6 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे और उनके नाम के पीछे भी बड़ी रोचक कहानी है. दरअसल उनकी मां किंग जॉर्ज-V की प्रशंसक थी, इसलिए उन्होंने अपने पहले बेटे का नाम जॉर्ज रखा था. बता दें कि किंग जॉर्ज का जन्म भी 3 जून को ही हुआ था. कहा जाता है कि जॉर्ज फर्नांडिस 10 भाषाओं के जानकार थें, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, तुलु, कोंकणी आदि भाषाएं शामिल हैं. उन्होंने अपने शुरुआती सालों में अपने घर के पास सरकारी स्कूल और चर्च स्कूल में पढ़ाई की थी. उसके बाद उन्होंने St. Aloysius College से पढ़ाई की. रिपोर्ट्स के अनुसार उनके पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे, लेकिन जॉर्ज फर्नांडिस वकील नहीं बनना चाहते थे. 

आज सूबे में उद्योग-धंधों की स्थापना की बात चल रही है। कुटीर व लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पुराने उद्योग-धंधों को जीवंत करने का खाका तैयार किया जा रहा है। एक दौर था, जब उत्तर बिहार इसका माडल हुआ करता था। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरपुर से पांच बार सांसद रहे जार्ज फर्नांडिस की भूमिका अव्वल रही। उन्होंने यहां एक नहीं दर्जनों उद्योग स्थापित कराए थे। कई पहचान राष्ट्रीय स्तर की थी। आज उनके प्रयास से लगे कई उद्योग हजारों लोगों के रोजगार का साधन हैं। 

1977 में यहां से पहली बार विजयी हुए

जार्ज फर्नांडिस पांच बार मुजफ्फरपुर के सांसद रहे। 1977 में यहां से पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद उनका गहरा जुड़ाव हो गया। उस समय जिला उद्योग के मामले में पिछड़ा था। बेरोजगारी और गरीबी थी। पलायन था। ऐसे समय उन्होंने यहां की तस्वीर बदलने की शुरुआत की। वह जानते थे कि कुटीर एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने मुजफ्फरपुर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास संस्थान के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना कराई थी। इसके माध्यम से मुजफ्फरपुर ही नहीं, राज्य के 22 जिलों में रोजगार को बढ़ावा देने का काम हो रहा है।

लिज्जत पापड़ दे रहा रोजगार

यहां की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए 1978 में लिज्जत पापड़ की इकाई उनके प्रयास से स्थापित हुई। 60 महिलाओं से शुरू इस इकाई से आज करीब 600 महिलाएं जुड़ी हैं। यह रोजगार का बड़ा साधन है। जार्ज के प्रयास से बना बेला औद्योगिक क्षेत्र 393 एकड़ में है। यहां छोटी-बड़ी दो सौ से अधिक फैक्ट्रियां हैं। हजारों लोगों को रोजगार मिला है। कांटी थर्मल पावर, मधौल पावर ग्रिड, मुजफ्फरपुर दूरदर्शन और बगहा-छितौनी रेल पुल की स्थापना उनकी देन है। वर्ष 1977 में जार्ज के प्रयास से इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (आइडीपीएल) की स्थापना हुई थी। उपेक्षा के चलते धीरे-धीरे यह यूनिट बदहाल होती गई। अप्रैल, 1996 में यूनिट से उत्पादन बंद कर दिया गया। उनकी देन भारत वैगन भी बंद हो गया। जार्ज के करीबी रहे समाजवादी डा. हरेंद्र कुमार कहते हैं कि जार्ज साहब चाहते थे कि मोतीपुर में चल रही चीनी मिल के अलावा यहां एक और मिल लगे, लेकिन उनका वह सपना पूरा नहीं हो सका।

जेल का फाटक टूटेगा, जार्ज हमारा छूटेगा

1977 के आम चुनाव में जब जार्ज ने यहां से चुनाव लडऩे की घोषणा की तो यह जमीन उनके लिए नई थी। उस समय वे जेल में थे। वहीं से उन्होंने चुनाव लड़ा। हाथ उठाए हथकड़ी वाला उनका कटआउट चुनाव प्रचार का बैनर-पोस्टर था। जेल का फाटक टूटेगा, जार्ज हमारा छूटेगा... जैसे नारे लगाए जाते थे। उनके चुनाव में युवाओं की टोली के साथ सक्रिय रहने वाले जदयू नेता प्रो.शब्बीर अहमद कहते हैं कि जार्ज की बनाई जमीन पर आज उद्योगों का विकास हो रहा है। 

[लेख-वरीय पत्रकार बाबा की कलम से .....]

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